गोपेश्वर (चमोली)। दशोली ब्लाॅक के निजमूला घाटी के काली चट्टान भू-स्खलन ट्रीटमेंट और झींझी पुल निर्माण में हो रही देरी पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी से कार्य में तेजी लाने की गुहार लगाई है। इस पर डीएम ने एक सप्ताह के भीतर स्थलीय निरीक्षण का भरोसा दिलाया है।
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह बिष्ट के नेतृत्व में डीएम को मिले ग्रामीणों के शिष्टमंडल ने बताया कि निजमूला-गौणा-पाणा-ईराणी मोटर मार्ग पर झींझी गधेरे (बिरही गंगा) में निर्माणाधीन पुल सात वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो पाया है, वहीं दूसरी ओर बिरही-निजमूला मोटर मार्ग पर स्थित काली चट्टान लगातार पत्थर गिरने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है। कहा कि वर्ष 2025 से काली चट्टान में लगातार भू-स्खलन होने से पहाड़ी से पत्थर छिटक रहे है। इससे यहां पर आवाजाही कठिन हो रही है। लगातार आ रहे मलवे और पत्थरों से लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही को मजबूर हो रहे है। उनका कहना था कि झींझी गधेरे में पीएमजीएसवाई के तहत वर्ष 2019 में मोटर पुल का निर्माण कार्य शुरू किया था। लेकिन सात वर्ष बीत जाने के बावजूद कार्यदायी संस्था केवल पुल के पिलर ही तैयार कर पाई है। पुल निर्माण कार्य अधूरा होने के चलते विभाग ने लगभग 1.5 किलोमीटर लंबा अस्थायी बाईपास मार्ग बनाया है। इसकी स्थिति भी बेहद खराब बनी हुई है। इससे वाहनों की आवाजाही मुश्किल से हो रही है। कहा कि यदि समय रहते सड़क मार्ग और पुल का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया जाता है तो आने वाले मानसून में निजमूला, गौणा, पाणा और ईराणी गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट सकता है। इससे मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में गंभीर कठिनाइयां उत्पन्न होंगी। उन्होंने जिलाधिकारी से काली चट्टान का स्थाई ट्रीटमेंट व झींझी पुल निर्माण होने तक बाईपास मार्ग के सुधारीकरण की मांग की है।
इस दौरान मोहन सिंह नेगी, बृज लाल, भरत सिंह राणा, विनोद लाल, सुरेंद्र सिंह गडिया, सुनीता देवी, सीमा देवी, मंदोदरी देवी, वीरेंद्र सिंह फरस्वाण आदि मौजूद रहे।

