श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय और गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की संयुक्त पहल, विश्व पर्यावरण दिवस पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन, प्रकृति संरक्षण और सतत विकास पर हुआ मंथन

  • विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर वेबिनार का सफल आयोजन “प्रकृति की रक्षा, सतत भविष्य की दिशा” विषय पर श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय एवं गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की संयुक्त पहल।

ऋषिकेश : पंडित ललित मोहन शर्मा श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर, ऋषिकेश के IQAC एवं शोध एवं विकास प्रकोष्ठ तथा गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा के संयुक्त तत्वावधान में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। इस वेबिनार का विषय Protecting Nature for a Sustainable Future था । यह आयोजन दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक सहयोग, पर्यावरणीय जागरूकता एवं शोध आधारित संवाद को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वेबिनार में श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन. के. जोशी ने अपने संदेश में कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी वैश्विक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि “शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाएं तथा सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में सक्रिय योगदान दें।

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने अपने संदेश में कहा कि विश्वविद्यालयों के बीच इस प्रकार के सहयोगात्मक कार्यक्रम न केवल ज्ञान-विनिमय को बढ़ावा देते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण जैसे वैश्विक मुद्दों पर ठोस समाधान खोजने में भी सहायक होते हैं।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता प्रो. अरुणदीप अहलुवालिया (भूवैज्ञानिक, पर्यावरणविद एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ ) ने पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विस्तृत एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि हिमालय विश्व की सबसे युवा पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, इसलिए यह भूगर्भीय दृष्टि से अत्यंत सक्रिय क्षेत्र है। उन्होंने भूकम्प के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों, पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं तथा बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य पर विशेष प्रकाश डाला। उनके प्रस्तुत उदाहरणों और शोध आधारित तथ्यों ने यह स्पष्ट किया कि हिमालय केवल एक भौगोलिक संरचना नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन, जल और जैव विविधता का आधार है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो.एम.एस. रावत, निदेशक, पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर, ऋषिकेश द्वारा की गई। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि इस प्रकार के वेबिनार विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता एवं शोध रुचि को बढ़ाते हैं।

कार्यक्रम संयोजक प्रो. जी. के. ढींगरा, निदेशक, IQAC एवं R&D प्रकोष्ठ ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कि प्रो. अहलूवालिया का व्याख्यान यह संदेश देता है कि हिमालय को समझना और उसकी संवेदनशीलता का सम्मान करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित किए बिना हिमालयी क्षेत्रों का सुरक्षित भविष्य संभव नहीं है। यह वेबिनार न केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बना, बल्कि श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय एवं गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के बीच मजबूत शैक्षणिक साझेदारी का भी प्रतीक साबित हुआ। कार्यक्रम का संचालन ऑनलाइन माध्यम से दिनांक 5 जून 2026, सायं 7:00 बजे किया गया, जिसमें देशभर से प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

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