सीबीआई को 7 दिन का अल्टीमेटम, नहीं बताई जांच की प्रगति तो होगी तालाबंदी

देहरादून। अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने सोमवार को देहरादून स्थित सीबीआई कार्यालय का घेराव कर अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। मंच ने सीबीआई को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर जांच की प्रगति पर संतोषजनक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई तो व्यापक जनभागीदारी के साथ आंदोलन तेज किया जाएगा और सीबीआई कार्यालय की तालाबंदी की जाएगी।

प्रदर्शनकारियों ने सीबीआई से मांग की कि पिछले छह माह से चल रही जांच की वर्तमान स्थिति को सार्वजनिक किया जाए तथा जांच से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों पर स्पष्ट जवाब दिए जाएं। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की।

प्रदर्शन के दौरान प्रारंभ में सीबीआई अधिकारियों ने कार्यालय का मुख्य द्वार बंद कर दिया और प्रदर्शनकारियों को अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। बाद में चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को सीबीआई कार्यालय के भीतर बुलाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने सीबीआई के अधिकारियों से मुलाकात कर जांच में हो रही देरी पर असंतोष व्यक्त किया और अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।

मंच की सदस्य कमला पंत ने कहा कि अंकिता भंडारी प्रकरण केवल एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि मंच का उद्देश्य किसी निष्कर्ष पर पहुंचना नहीं, बल्कि जांच की वास्तविक स्थिति और उठाए गए सवालों पर हो रही कार्रवाई की जानकारी प्राप्त करना है।

निर्मला बिष्ट ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्याय प्रक्रिया जितनी निष्पक्ष होनी चाहिए, उतनी ही पारदर्शी भी होनी चाहिए। वहीं सुजाता पॉल ने कहा कि छह माह बीतने के बाद भी जांच को लेकर कई सवाल बने हुए हैं और पारदर्शिता से ही जनता का विश्वास मजबूत हो सकता है। उमा भट्ट ने कहा कि यह मामला समाज के सामने कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है। जांच प्रक्रिया में नियमित जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक है ताकि पीड़ित परिवार और आम नागरिकों का भरोसा बना रहे।

युवा कार्यकर्ता मोहित डिमरी ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ रही है और पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद बनी रहे।

इस दौरान  पदमा गुप्ता, मंजू बलोदी, बिमला, स्मृति नेगी, सुशीला अमोली, पुष्पा नौडियाल, गीता बागड़ी, हिलता नेगी, ज्योति नेगी, मीणा राणा, यशोदा, शांता नैथानी, प्रेमलता बलूनी, शांति सेमवाल, सतेश्वरी देवी समेत तमाम  कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने मौजूद रहे।

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