भारत-नेपाल सीमा पर ‘कस्टम’ की दीवार, खतरे में ‘रोटी-बेटी’ का प्राचीन रिश्ता

नई दिल्ली/काठमांडू : भारत और नेपाल के बीच की सीमा कभी नक्शे पर खिंची केवल एक लकीर नहीं थी; यह साझा चूल्हे और साझा संस्कृति का गलियारा रही है। लेकिन 15 अप्रैल 2026 से नेपाल की बालेन सरकार द्वारा लागू किए गए नए कस्टम नियमों ने इस सहज रिश्ते में कड़वाहट घोल दी है। ₹100 से अधिक के सामान पर भारी टैक्स की वसूली ने सीमावर्ती व्यापार को ठप कर दिया है और मानवीय संवेदनाओं को आक्रोश में बदल दिया है।

सीमा पर सुलगता आक्रोश

हाल ही में सीतामढ़ी बॉर्डर पर नेपाली सुरक्षाकर्मियों द्वारा भारतीय वाहनों को जब्त किए जाने के बाद स्थिति विस्फोटक हो गई। स्थानीय लोगों ने विरोध में नेपाली वाहनों की आवाजाही रोक दी। सशस्त्र सीमा बल (SSB) के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत तो हुआ, लेकिन व्यापारियों के मन में सुलग रही आशंका अब भी बरकरार है।

व्यापार जगत में हड़कंप: “यह लूट है”

मोतिहारी से लेकर अररिया तक के व्यापारी इस फैसले को 1950 की भारत-नेपाल व्यापार संधि का खुला उल्लंघन बता रहे हैं। स्थानीय व्यापारी अविनाश कुमार कहते हैं, “हमारा कारोबार ठप हो गया है। ₹100 की सीमा व्यावहारिक नहीं है। यह खुला व्यापार नहीं, बल्कि खुली लूट है।”

संकट में ‘रोटी-बेटी’ का संबंध

यह विवाद केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। नेपाल बॉर्डर से सटे बिहार के जिलों में हजारों शादियां और पारिवारिक रिश्ते सरहद के पार हैं। रोजमर्रा की जरूरतें एक-दूसरे के बाजारों से पूरी होती थीं। अब बढ़ती सख्ती और वाहनों की धरपकड़ से दोनों देशों के बीच की सामाजिक डोर कमजोर पड़ने का खतरा है।

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