वेदपाठी भर्ती में दो साल की देरी पर फूटा अभ्यर्थियों का गुस्सा, मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की गुहार

जोशीमठ : बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में वेदपाठी के पदों पर लंबे समय से लंबित पड़ी नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर संस्कृत और वैदिक अध्ययन से जुड़े युवाओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। वर्षों से अधर में लटकी इस भर्ती से परेशान होकर वेदपाठी अभ्यर्थियों ने अब सीधे सूबे के मुख्यमंत्री को गुहार लगाते हुए एक सामूहिक प्रार्थना पत्र प्रेषित किया है, अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि मंदिर समिति योग्य युवाओं के भविष्य और राज्य की समृद्ध वैदिक परंपराओं के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे अपने अभिभावकों के साथ उग्र आंदोलन करने और (कोर्ट) की शरण में जाने के लिए मजबूर होंगे।

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा वेदपाठी पदों पर स्थायी नियुक्ति हेतु विज्ञप्ति क्रमांक 493/विज्ञप्ति/2024-25 दिनांक 08 अगस्त 2024 को जारी की गई थी। इसके तहत प्रदेश भर के अभ्यर्थियों ने ₹560/- के निर्धारित आवेदन शुल्क और अपने सभी आवश्यक शैक्षणिक व वैदिक योग्यता संबंधी दस्तावेजों के साथ 30 अगस्त 2024 की नियत अंतिम तिथि तक विभागीय कार्यालय में फॉर्म जमा किए थे। इसके बाद विभाग द्वारा अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच और सत्यापन के लिए समिति गठित कर आवश्यक जांच प्रक्रिया भी पूर्ण कर ली गई थी। मंदिर समिति की आधिकारिक वेबसाइट पर अंकित सूचना के मुताबिक, 24 सितंबर 2024 को चयनित अभ्यर्थियों को साक्षात्कार (इंटरव्यू) के लिए आमंत्रित किया जाना तय था, लेकिन विडंबना यह है कि लगभग दो वर्ष का लंबा समय व्यतीत हो जाने के उपरांत भी समिति द्वारा साक्षात्कार अथवा नियुक्ति प्रक्रिया संबंधी कोई आगे की सूचना या स्पष्टीकरण प्रदान नहीं किया गया।

गौरतलब है कि वेदपाठी के ये कुल 4 पद पिछले 14 सालों से रिक्त चल रहे हैं, मदिर समिति ने इन पदों को भरने के लिए इससे पूर्व वर्ष 2018 और वर्ष 2023 में भी पृथक-पृथक विज्ञप्तियां जारी कर अभ्यर्थियों से आवेदन शुल्क सहित फॉर्म जमा करवाए थे, लेकिन उन प्रक्रियाओं का भी आज तक कोई अंतिम निष्पादन नहीं हो सका। वर्तमान में चल रही यह भर्ती प्रक्रिया तीसरी कोशिश है, जो अब भी अधर में लटकी है, जिससे योग्य युवा अभ्यर्थी भारी मानसिक तनाव और असमंजस के दौर से गुजर रहे हैं।

​अभ्यर्थियों ने मंदिर समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ समिति द्वारा विधि अधिकारी, प्रचार अधिकारी, संपत्ति निरीक्षक, सहायक अभियंता, अवर अभियंता, सहायक लेखाकार और डिमॉन्स्ट्रेटर जैसे अन्य तमाम प्रशासनिक व तकनीकी पदों पर लगातार विज्ञापन निकालकर धड़ल्ले से प्रतिनियुक्तियां की जा रही हैं, लेकिन दूसरी तरफ मंदिर के सबसे मुख्य और रीढ़ माने जाने वाले ‘वेदपाठी’ पदों को जानबूझकर खाली रखा जा रहा है। इस गंभीर कमी को छुपाने के लिए समिति विगत 4 वर्षों से स्थानीय संस्कृत विद्यालयों के नियमित अध्यापकों को बुलाकर मंदिरों में वेदपाठ का कार्य करवा रही है। इसका सीधा और घातक असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है; शिक्षकों की लंबी अनुपस्थिति के कारण संस्कृत विद्यालयों में छात्रों की संख्या लगातार घट रही है और कई विद्यालय बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। इस विषय पर ज्योतिर्मठ की स्थानीय समिति ‘देव-पूजा समिति’ द्वारा भी एक पत्र के माध्यम से बीकेटीसी (BKTC) को अपनी पीड़ा और चिंताओं से अवगत कराया जा चुका है।

​ अभ्यर्थियों ने अपनी इस समस्या को लेकर इसी वर्ष 05 मार्च 2026 को मंदिर समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मुख्य कार्याधिकारी एवं अन्य सदस्यों को सामूहिक पत्र भेजकर अपनी पीड़ा से अवगत कराया था। इसके अतिरिक्त, अभ्यर्थियों द्वारा 19 एवं 20 मार्च 2026 को पृथक-पृथक रूप से उत्तराखंड मुख्यमंत्री हेल्पलाइन/पोर्टल पर भी अपनी ऑनलाइन शिकायतें दर्ज कराई गई थीं, लेकिन शासन-प्रशासन और विभाग की उदासीनता के चलते आज तक उन शिकायतों का कोई निस्तारण अथवा संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है।

​इस न्यायोचित मांग को उठाने वाले मुख्य वेदपाठी अभ्यर्थियों में अतुल डिमरी, सौरभ कोठियाल, शशिभूषण नौटियाल, सुधाकर उनियाल, प्रशांत डिमरी, हिमांशु बहुगुणा, प्रांशु सती, कृष्णा पंत, चंद्रमणि पांडे, पूर्णानन्द जोशी, रुपेश जोशी, आशीष किमोठी तथा अमित सहित कई अन्य अभ्यर्थी शामिल हैं, जिन्होंने पत्र के अंत में अपने हस्ताक्षर कर सामूहिक विरोध दर्ज कराया है।

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